Tuesday, 25 April 2017

जहाँ कार्तिकेय जी ने दान मे दे डाली अपनी हड्डियाँ :                     कार्तिकेय स्वामी मन्दिर



कार्तिकेय स्वामी मंदिर 

भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व मे देवात्मा हिमालय का अपना अलग ही स्थान है। हिमालय शृंखला मे लगभग जितने भी सुन्दर स्थान हैं वहाँ आपको देव स्थल अवश्य मिल जायेंगे। हिमालय की इन विराट शृंखलाओं के मध्य मात-पित्र भक्ति को समर्पित एक अत्यन्त अलौकिक तीर्थ स्थल है - कार्तिकेय स्वामी मन्दिर। रुद्रप्रयाग-पखोरी सड़क मार्ग पर एक छोटा सा गाँव है - कनकचौरी। रुदप्रयाग से यहाँ की दूरी लगभग 40 किमी. है।



रुद्रप्रयाग-पखोरी सड़क मार्ग 

हिमालय की गोद मे बसे इस सुंदर गाँव से कार्तिकेय स्वामी मन्दिर पहुँचने के लिए यात्रियो को लगभग 3-4 किमी. का पैदल मार्ग तय करना होता है। घने जंगलों से घिरा ये सम्पूर्ण मार्ग हल्की चढ़ाई वाला है। यहाँ जंगली जानवरों का भय सदैव बना रहता है जिस कारण तीर्थयात्रियों एंव सैलानियों को भय एंव रोमांच का एक साथ अनुभव होता है। मन्दिर से कुछ पहले मुख्य पुजारी जी का निवास स्थान है जहाँ 2-3 कमरे यात्रियो के ठहरने के लिए बनाये गए हैं किन्तु अधिक व्यवस्था न होने के कारण लगभग सभी यात्री दर्शनोपरांत वापिस कनकचौरी आ जाते हैं। मन्दिर तक पहुँचने के लिए लगभग 30-40   सीढ़ियाँ है। इन सीढ़ियो के एक ओर गहरी खाई होने के कारण यात्रियो को सावधानीपूर्वक सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। मन्दिर प्रांगण मे पहुँचने पर नज़ारा देखते 40 ही कुछ सेकंड के लिए दिल-दिमाग स्थिर हो जाता है। यह स्थान समुन्द्र तल से लगभग 3048 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।  



मंदिर प्रांगण मे भक्तजन 

पुराणों मे वर्णित कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव ने अपने पुत्रों (भगवान गणेश एंव भगवान कार्तिकेय) से कहा कि जो भी सबसे पहले सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाकर वापिस मेरे पास आएगा वह ही मेरा प्रिय पुत्र होगा। कार्तिकेय जी सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का चक्कर लगा आए, किन्तु गणेश जी ने माता-पिता को ही अपना ब्रह्माण्ड मानते हुए उनका चक्कर लगा लिया। ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाकर वापसी आने पर जब कार्तिकेय जी को सच्चाई का पता चला तो क्रोधवश उन्होने अपनी हड्डियाँ भगवान शिव तथा माँस माता पार्वती को समर्पित कर दिया। भगवान कार्तिकेय जी की हड्डियाँ आज भी इस मन्दिर मे रखी हुई हैं, जिनकी पूजा करने भक्त यहाँ आते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्तों द्वारा बाँधी गई घंटियाँ उनकी श्रद्धा एंव आस्था को दर्शाती हैं। साफ मौसम मे चारों ओर दृष्टि डालने पर बर्फ से आछन्दित चौखम्बा, बंदर पूँछ, द्रोणागिरी, नन्दा घूंटी, केदार डोम, मेरु-सुमेरु आदि चोटियाँ दृष्टिगोचर होती हैं। इतनी ऊँचाई से जिस ओर दृष्टि डालो हरियाली ही हरियाली मन को मंत्रमुग्ध कर देती है। 

हरियाली से सराबोर प्रकृति 

हरियाली से सराबोर इन जंगलों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि अभी तक यहाँ प्रकृति से कोई छेड़-छाड़ नहीं की गयी है। शांति से परिपूर्ण इस वातावरण मे आकर कोई भी व्यक्ति अपने मन को एकाग्रचित कर सकता है। प्रकृति से साक्षात्कार कराता यह वातावरण तीर्थयात्रियों एंव सैलानियों को बार बार यहाँ आने के लिए प्रेरित करता है।  

मंदिर से दृष्टिगोचर सुन्दर घाटियाँ 

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